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mahabharat 2.73.1: शकुनि ने कहा, "कुंतीपुत्र युधिष्ठिर! तुम पांडवों का बहुत सारा धन पहले ही गँवा चुके हो। यदि तुम्हारे पास कोई ऐसा धन बचा हो जो तुमने गँवाया न हो, तो कृपया मुझे बताओ।"   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.73.1 
शकुनिरुवाच
बहु वित्तं पराजैषी: पाण्डवानां युधिष्ठिर।
आचक्ष्व वित्तं कौन्तेय यदि तेऽस्त्यपराजितम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
शकुनि ने कहा, "कुंतीपुत्र युधिष्ठिर! तुम पांडवों का बहुत सारा धन पहले ही गँवा चुके हो। यदि तुम्हारे पास कोई ऐसा धन बचा हो जो तुमने गँवाया न हो, तो कृपया मुझे बताओ।"
 
Shakuni said- Kunti's son Yudhishthira! You have already lost a lot of the Pandava's wealth. If you have any wealth left that you haven't lost, please tell me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)