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mahabharat 2.72.9: जिनसे प्रेरित होकर मनुष्य अपने सिर से पर्वत को छेदना चाहता है, अर्थात् पत्थर पर सिर पटककर स्वयं को कष्ट पहुँचाता है और जिनकी प्रेरणा से मनुष्य साँप को दूध पिलाकर ऊपर लाता है, उन्हीं सर्वशक्तिमान की बुद्धि सम्पूर्ण जगत् की गतिविधियों का संचालन करती है। जो किसी पर बलपूर्वक अपना उपदेश थोपता है, वह अपने आचरण से उसे अपना शत्रु बना लेता है।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.72.9 
भिनत्ति शिरसा शैलमहिं भोजयते च य:।
धीरेव कुरुते तस्य कार्याणामनुशासनम्।
यो बलादनुशास्तीह सोऽमित्रं तेन विन्दति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिनसे प्रेरित होकर मनुष्य अपने सिर से पर्वत को छेदना चाहता है, अर्थात् पत्थर पर सिर पटककर स्वयं को कष्ट पहुँचाता है और जिनकी प्रेरणा से मनुष्य साँप को दूध पिलाकर ऊपर लाता है, उन्हीं सर्वशक्तिमान की बुद्धि सम्पूर्ण जगत् की गतिविधियों का संचालन करती है। जो किसी पर बलपूर्वक अपना उपदेश थोपता है, वह अपने आचरण से उसे अपना शत्रु बना लेता है।॥9॥
 
Inspired by Him, man wants to pierce the mountain with his head, i.e. by banging his head on a stone, he hurts himself and by whose inspiration man feeds milk to a snake and brings it up, the intellect of that same Almighty controls the activities of the whole world. One who forcibly imposes his teachings on someone, makes him his enemy by his behavior.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)