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mahabharat 2.72.8: देखो, इस जगत् का एक ही शासक है, दूसरा नहीं। वही शासक माता के गर्भ में सोए हुए शिशु पर भी शासन करता है; मैं भी उसी के अधीन हूँ। अतः जैसे जल स्वाभाविक रूप से नीचे की ओर बहता है, वैसे ही जगत् के रचयिता मुझे जो भी कार्य सौंपते हैं, मैं उसी कार्य में लग जाता हूँ ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.72.8 
एक: शास्ता न द्वितीयोऽस्ति शास्ता
गर्भे शयानं पुरुषं शास्ति शास्ता।
तेनानुशिष्ट: प्रवणादिवाम्भो
यथा नियुक्तोऽस्मि तथा भवामि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
देखो, इस जगत् का एक ही शासक है, दूसरा नहीं। वही शासक माता के गर्भ में सोए हुए शिशु पर भी शासन करता है; मैं भी उसी के अधीन हूँ। अतः जैसे जल स्वाभाविक रूप से नीचे की ओर बहता है, वैसे ही जगत् के रचयिता मुझे जो भी कार्य सौंपते हैं, मैं उसी कार्य में लग जाता हूँ ॥8॥
 
See, there is only one ruler of this world, not another. The same ruler rules even the infant sleeping in the womb of the mother; I am also disciplined by him. So, just as water naturally flows downwards, in the same way, whatever work the creator of the universe puts me to, I get involved in that work only. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)