Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.72.7: विदुर! आप मुझे कर्ता न समझें और प्रतिदिन हमसे कटु बातें न करें। मैं आपसे अपने कल्याण के लिए कोई सलाह नहीं माँगता। आपका कल्याण हो। हम आपके कटु वचनों को सहन करते रहते हैं, अतः आप हम क्षमाशील लोगों को अपने वचन रूपी बाणों से न छेदें।   |   mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.72.7 
अहं कर्तेति विदुर मा च मंस्था
मा नो नित्यं परुषाणीह वोच:।
न त्वां पृच्छामि विदुर यद्धितं मे
स्वस्ति क्षत्तर्मा तितिक्षून् क्षिणु त्वम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
विदुर! आप मुझे कर्ता न समझें और प्रतिदिन हमसे कटु बातें न करें। मैं आपसे अपने कल्याण के लिए कोई सलाह नहीं माँगता। आपका कल्याण हो। हम आपके कटु वचनों को सहन करते रहते हैं, अतः आप हम क्षमाशील लोगों को अपने वचन रूपी बाणों से न छेदें।
 
Vidur! Do not think that I am the doer and do not say bitter things to us everyday. I do not ask you for any advice regarding my welfare. May you be blessed. We keep tolerating your harsh words, so do not pierce us, who are forgiving, with the arrows of your words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)