Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.72.3: हमारे लिए तो तुम हमारी गोद में बैठे हुए साँप के समान हो और जिसने तुम्हें पाला, उसी का गला घोंट रहे हो। तुम अपने स्वामी के प्रति विश्वासघाती हो, फिर भी लोग तुम्हें पापी नहीं कहते। विदुर! तुम इस पाप से क्यों नहीं डरते?॥3॥ | mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उत्सङ्गे च व्याल इवाहितोऽसि
मार्जारवत् पोषकं चोपहंसि।
भर्तृघ्नं त्वां न हि पापीय आहु-
स्तस्मात् क्षत्त: किं न बिभेषि पापात्॥ ३॥
अनुवाद
हमारे लिए तो तुम हमारी गोद में बैठे हुए साँप के समान हो और जिसने तुम्हें पाला, उसी का गला घोंट रहे हो। तुम अपने स्वामी के प्रति विश्वासघाती हो, फिर भी लोग तुम्हें पापी नहीं कहते। विदुर! तुम इस पाप से क्यों नहीं डरते?॥3॥
For us you are like a snake sitting in our lap and like a cat you are strangling the one who raised you. You are disloyal to your master, yet people do not call you a sinner. Vidur! Why are you not afraid of this sin?॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥