Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.72.16: इस संसार में कोई महापापी अवश्य मिल सकता है जो सदैव हृदय को प्रिय लगने वाले वचन बोलता है; किन्तु कोई ऐसा व्यक्ति दुर्लभ है जो हितकर होने पर भी अप्रिय वचन बोलता और सुनता है ॥16॥ | mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लभ्यते खलु पापीयान् नरो नु प्रियवागिह।
अप्रियस्य हि पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभ:॥ १६॥
अनुवाद
इस संसार में कोई महापापी अवश्य मिल सकता है जो सदैव हृदय को प्रिय लगने वाले वचन बोलता है; किन्तु कोई ऐसा व्यक्ति दुर्लभ है जो हितकर होने पर भी अप्रिय वचन बोलता और सुनता है ॥16॥
In this world one may certainly find a great sinner who always speaks words that are pleasing to the heart; but rare are those who speak and listen to unpleasant words, even though they are beneficial. ॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥