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mahabharat 2.72.14: जिस प्रकार श्रोत्रिय के घर में दुष्ट स्त्री अग्निहोत्र आदि कल्याणकारी कार्यों में नहीं लग सकती, उसी प्रकार मंदबुद्धि पुरुष भी कल्याण के मार्ग पर नहीं लग सकता। जिस प्रकार अविवाहित कन्या अपने साठ वर्ष के पति को प्रिय नहीं लगती, उसी प्रकार भरतवंश के प्रधान दुर्योधन को भी मेरी यह सलाह रुचिकर नहीं लगती। 14॥   |   mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.72.14 
न श्रेयसे नीयते मन्दबुद्धि:
स्त्री श्रोत्रियस्येव गृहे प्रदुष्टा।
ध्रुवं न रोचेद् भरतर्षभस्य
पति: कुमार्या इव षष्टिवर्ष:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार श्रोत्रिय के घर में दुष्ट स्त्री अग्निहोत्र आदि कल्याणकारी कार्यों में नहीं लग सकती, उसी प्रकार मंदबुद्धि पुरुष भी कल्याण के मार्ग पर नहीं लग सकता। जिस प्रकार अविवाहित कन्या अपने साठ वर्ष के पति को प्रिय नहीं लगती, उसी प्रकार भरतवंश के प्रधान दुर्योधन को भी मेरी यह सलाह रुचिकर नहीं लगती। 14॥
 
Just as a wicked woman in a Shrotriya's house cannot be engaged in welfare activities like Agnihotra etc., in the same way a dull-witted man cannot be engaged on the path of welfare. Just as an unmarried girl cannot like her sixty year old husband, in the same way Duryodhana, the head of Bharat dynasty, definitely does not find my advice interesting. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)