Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.72.11: विदुर! जो शत्रु का पक्षपाती हो, आपसे द्वेष रखता हो और आपको हानि पहुँचाता हो, ऐसे व्यक्ति को घर में नहीं रहने देना चाहिए। अतः जहाँ आपकी इच्छा हो, वहाँ चले जाएँ। पतिव्रता स्त्री को चाहे आप मीठे वचनों से कितना ही सांत्वना दें, वह अपने पति को छोड़ देती है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.72.11 
न वासयेत् पारवर्ग्यं द्विषन्तं
विशेषत: क्षत्तरहितं मनुष्यम्।
स यत्रेच्छसि विदुर तत्र गच्छ
सुसान्त्विता ह्यसती स्त्री जहाति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
विदुर! जो शत्रु का पक्षपाती हो, आपसे द्वेष रखता हो और आपको हानि पहुँचाता हो, ऐसे व्यक्ति को घर में नहीं रहने देना चाहिए। अतः जहाँ आपकी इच्छा हो, वहाँ चले जाएँ। पतिव्रता स्त्री को चाहे आप मीठे वचनों से कितना ही सांत्वना दें, वह अपने पति को छोड़ देती है ॥11॥
 
Vidur! One who is biased towards the enemy, hates you and does harm, such a person should not be allowed to stay in the house. Therefore, go wherever you wish. No matter how much you console a promiscuous woman with sweet words, she leaves her husband. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)