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mahabharat 2.72.1: दुर्योधन ने कहा- विदुर! तुम सदैव हमारे शत्रुओं की कीर्ति का बखान करते हो और हम सब धृतराष्ट्रपुत्रों की निन्दा करते हो। मैं जानता हूँ कि तुम किसके प्रेमी हो, किन्तु हमें मूर्ख समझकर तुम सदैव हमारा अपमान करते हो॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 2.72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 72: दुर्योधनका विदुरको फटकारना और विदुरका उसे चेतावनी देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.72.1 
दुर्योधन उवाच
परेषामेव यशसा श्लाघसे त्वं
सदा क्षत्त: कुत्सयन् धार्तराष्ट्रान्।
जानीमहे विदुर यत् प्रियस्त्वं
बालानिवास्मानवमन्यसे नित्यमेव॥ १॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- विदुर! तुम सदैव हमारे शत्रुओं की कीर्ति का बखान करते हो और हम सब धृतराष्ट्रपुत्रों की निन्दा करते हो। मैं जानता हूँ कि तुम किसके प्रेमी हो, किन्तु हमें मूर्ख समझकर तुम सदैव हमारा अपमान करते हो॥ 1॥
 
Duryodhan said- Vidur! You always boast about the good fame of our enemies and criticize all of us, the sons of Dhritarashtra. I know whose lover you are, but considering us fools you always insult us.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)