श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 71: विदुरजीके द्वारा जूएका घोर विरोध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.71.1 
विदुर उवाच
द्यूतं मूलं कलहस्याभ्युपैति
मिथो भेदं महते दारुणाय।
यदास्थितोऽयं धृतराष्ट्रस्य पुत्रो
दुर्योधन: सृजते वैरमुग्रम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले- महाराज! जुआ ही झगड़ों का मूल कारण है। यह प्रजा में फूट डालता है, जिससे भयंकर संकट उत्पन्न होता है। यह धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन इसी का आश्रय लेकर भयंकर शत्रुता उत्पन्न कर रहा है॥ 1॥
 
Vidur ji said— Maharaj! Gambling is the root cause of quarrels. It creates divisions among the people, which creates a terrible crisis. This Dhritarashtra's son Duryodhan is taking shelter of it and is creating a terrible enmity.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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