Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.70.d1h-16h: अन्यथा, उन पक्षियों को मारने वाले राजा की तरह तुम्हें भी मोह के कारण पश्चाताप करना पड़ेगा। यह छल तुम्हारा विनाश उसी प्रकार करेगा, जैसे बाँसुरी का काँटा निगलने से मछली नष्ट हो जाती है। हे भरतवंशी रत्न! जैसे माली बगीचे के वृक्षों को बार-बार सींचता रहता है और समय-समय पर उनमें खिले हुए फूलों को भी तोड़ता रहता है, उसी प्रकार तुम भी पाण्डवों के वृक्षों को प्रेम के जल से सींचते रहो और उनमें उगने वाले धनरूपी पुष्पों को ग्रहण करते रहो॥15 1/2॥ | mahabharat अध्याय 2.70: धृतराष्ट्रको विदुरकी चेतावनी । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्यथा, उन पक्षियों को मारने वाले राजा की तरह तुम्हें भी मोह के कारण पश्चाताप करना पड़ेगा। यह छल तुम्हारा विनाश उसी प्रकार करेगा, जैसे बाँसुरी का काँटा निगलने से मछली नष्ट हो जाती है। हे भरतवंशी रत्न! जैसे माली बगीचे के वृक्षों को बार-बार सींचता रहता है और समय-समय पर उनमें खिले हुए फूलों को भी तोड़ता रहता है, उसी प्रकार तुम भी पाण्डवों के वृक्षों को प्रेम के जल से सींचते रहो और उनमें उगने वाले धनरूपी पुष्पों को ग्रहण करते रहो॥15 1/2॥
Otherwise, like the king who killed those birds, you too will have to repent due to attachment. This treachery will lead to your destruction just as a fish is destroyed by swallowing the hook of a flute. O jewel of the Bharata clan! Just as a gardener keeps watering the trees in the garden again and again and also picks the flowers that bloom from them from time to time, in the same way you should keep watering the trees of the Pandavas with the water of love and keep taking the flowers of wealth that grow from them.॥ 15 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥