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mahabharat 2.70.12: सबके भावों को जानने वाले और समस्त शत्रुओं के प्रति भयंकर क्रोध करने वाले सर्वज्ञ शुक्राचार्य ने जम्भ नामक दैत्य के यज्ञ के समय समस्त महादैत्यों को यह कथा सुनाई थी॥12॥   |   mahabharat अध्याय 2.70: धृतराष्ट्रको विदुरकी चेतावनी   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 70: धृतराष्ट्रको विदुरकी चेतावनी  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.70.12 
सर्वज्ञ: सर्वभावज्ञ: सर्वशत्रुभयंकर:।
इति स्म भाषते काव्यो जम्भत्यागे महासुरान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सबके भावों को जानने वाले और समस्त शत्रुओं के प्रति भयंकर क्रोध करने वाले सर्वज्ञ शुक्राचार्य ने जम्भ नामक दैत्य के यज्ञ के समय समस्त महादैत्यों को यह कथा सुनाई थी॥12॥
 
The omniscient Shukracharya, who knows everyone's feelings and is fierce for all enemies, had narrated this story to all the great demons at the time of sacrificing the demon Jambha. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)