श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 70: धृतराष्ट्रको विदुरकी चेतावनी  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.70.11 
त्यजेत् कुलार्थे पुरुषं ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्।
ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण कुल के हित के लिए एक व्यक्ति का त्याग करो, गाँव के हित के लिए एक परिवार का त्याग करो, देश के हित के लिए एक गाँव का त्याग करो और आत्मा के उद्धार के लिए सम्पूर्ण संसार का त्याग करो ॥11॥
 
Forsake one person for the good of the whole family, forsake a family for the good of the village, forsake a village for the good of the country and forsake the whole world for the salvation of the soul. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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