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श्लोक 2.70.10  |
निग्रहादस्य पापस्य मोदन्तां कुरव: सुखम्।
काकेनेमांश्चित्रबर्हान् शार्दूलान् क्रोष्टुकेन च।
क्रीणीष्व पाण्डवान् राजन् मा मज्जी: शोकसागरे॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| यदि यह पापी कारागार में डाल दिया जाए, तो समस्त कौरव सुखपूर्वक रह सकेंगे। हे राजन! दुर्योधन कौआ है और पांडव मोर। इस कौए को तुम स्वयं को दे दो और विचित्र पंखों वाले मोर खरीद लो। इस सियार के द्वारा पांडव रूपी इन सिंहों को अपना लो। शोक सागर में डूबकर मत मरो॥10॥ |
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| If this sinner is imprisoned, all the Kauravas can live happily. O King! Duryodhan is a crow and the Pandavas are peacocks. Give this crow to yourself and buy peacocks with strange feathers. Adopt these lions in the form of the Pandavas through this jackal. Do not die by drowning in the sea of grief.॥10॥ |
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