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mahabharat 2.7.7-8: सिद्ध, देवर्षि, साध्यदेव और मरुतवंशी - ये सभी सुवर्णमय मालाओं से विभूषित और तेजस्वी रूप वाले, उस दिव्य सभा में एक साथ बैठकर शत्रुओं का नाश करने वाले महान देवराज इन्द्र की पूजा करते हैं। वे सभी देवता अपने अनुयायियों (सेवकों) के साथ वहाँ विराजमान रहते हैं। दिव्य रूप धारण करने के साथ-साथ वे उत्तम आभूषणों से भी विभूषित होते हैं। ॥7-8॥   |   mahabharat अध्याय 2.7: इन्द्रसभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 7: इन्द्रसभाका वर्णन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  2.7.7-8 
सिद्धा देवर्षयश्चैव साध्या देवगणास्तथा।
मरुत्वन्तश्च सहिता भास्वन्तो हेममालिन:॥ ७॥
एते सानुचरा: सर्वे दिव्यरूपा: स्वलंकृता:।
उपासते महात्मानं देवराजमरिंदमम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सिद्ध, देवर्षि, साध्यदेव और मरुतवंशी - ये सभी सुवर्णमय मालाओं से विभूषित और तेजस्वी रूप वाले, उस दिव्य सभा में एक साथ बैठकर शत्रुओं का नाश करने वाले महान देवराज इन्द्र की पूजा करते हैं। वे सभी देवता अपने अनुयायियों (सेवकों) के साथ वहाँ विराजमान रहते हैं। दिव्य रूप धारण करने के साथ-साथ वे उत्तम आभूषणों से भी विभूषित होते हैं। ॥7-8॥
 
Siddhas, Devarshis, Sadhyadevas and Marutvans - all of them, adorned with golden garlands and having radiant forms, sit together in that divine assembly and worship the great Devraj Indra, the destroyer of enemies. All those gods sit there with their followers (servants). Apart from having divine forms, they are also adorned with the finest ornaments. ॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)