Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.7.5: उस समय वे अवर्णनीय रूप धारण करते हैं। उनके सिर पर मुकुट और दोनों भुजाओं में लाल बाजूबंद हैं। वे स्वच्छ वस्त्र और गले में अनोखी माला से सुशोभित हैं। वे लज्जा, यश और तेज की देवियों के साथ उस दिव्य सभा में विराजमान हैं।॥5॥ | mahabharat अध्याय 2.7: इन्द्रसभाका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय वे अवर्णनीय रूप धारण करते हैं। उनके सिर पर मुकुट और दोनों भुजाओं में लाल बाजूबंद हैं। वे स्वच्छ वस्त्र और गले में अनोखी माला से सुशोभित हैं। वे लज्जा, यश और तेज की देवियों के साथ उस दिव्य सभा में विराजमान हैं।॥5॥
At that time he assumes an indescribable form. He wears a crown on his head and red armlets adorn both his arms. He is adorned with clean clothes and a unique garland around his neck. He sits in that divine assembly with the goddesses of shame, fame and brilliance. ॥5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥