श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 7: इन्द्रसभाका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.7.30 
एषा सभा मया राजन् दृष्टा पुष्करमालिनी।
शतक्रतोर्महाबाहो याम्यामपि सभां शृणु॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु राजन! मैंने अपनी आँखों से शतक्रतु इन्द्र का कमल मालाओं से सुसज्जित दरबार देखा है। अब यमराज के दरबार का वर्णन सुनो।
 
O mighty-armed king! I have seen with my own eyes the court of Shatakratu Indra, decorated with lotus garlands. Now listen to the description of the court of Yamaraja.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि लोकसभाख्यानपर्वणि इन्द्रसभावर्णनं नाम सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत लोकपालसभाख्यानपर्वमें इन्द्रसभा-वर्णन नामक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ३२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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