Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.7.28-29: बृहस्पति और शुक्र वहाँ प्रतिदिन निवास करते हैं। ये तथा अन्य अनेक तपस्वी मुनि, जिनका दर्शन चन्द्रमा के समान प्रिय है, चन्द्रमा के समान तेजस्वी विमानों में वहाँ उपस्थित रहते हैं। राजन! ब्रह्माजी के समान पराक्रमी भृगु आदि सप्तर्षि भी इन्द्र के दरबार की शोभा बढ़ाते हैं। 28-29॥   |   mahabharat अध्याय 2.7: इन्द्रसभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 7: इन्द्रसभाका वर्णन  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  2.7.28-29 
बृहस्पतिश्च शुक्रश्च नित्यमास्तां हि तत्र वै।
एते चान्ये च बहवो महात्मानो यतव्रता:॥ २८॥
विमानैश्चन्द्रसंकाशै: सोमवत्प्रियदर्शना:।
ब्रह्मण: सदृशा राजन् भृगु: सप्तर्षयस्तथा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पति और शुक्र वहाँ प्रतिदिन निवास करते हैं। ये तथा अन्य अनेक तपस्वी मुनि, जिनका दर्शन चन्द्रमा के समान प्रिय है, चन्द्रमा के समान तेजस्वी विमानों में वहाँ उपस्थित रहते हैं। राजन! ब्रह्माजी के समान पराक्रमी भृगु आदि सप्तर्षि भी इन्द्र के दरबार की शोभा बढ़ाते हैं। 28-29॥
 
Jupiter and Venus reside there daily. These and many other ascetic saints, whose sight is as dear as the moon, are present there in planes as bright as the moon. Rajan! Bhrigu and the seven sages, who are as powerful as Lord Brahma, also enhance the beauty of Indra's court. 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)