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mahabharat 2.7.26-27: ब्रह्मऋषि, राजऋषि तथा समस्त देवर्षि माला धारण किए हुए, वस्त्राभूषणों से विभूषित होकर, अग्नि के समान चमकते हुए नाना प्रकार के दिव्य विमानों द्वारा वहाँ आते-जाते हैं ॥26-27॥   |   mahabharat अध्याय 2.7: इन्द्रसभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 7: इन्द्रसभाका वर्णन  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  2.7.26-27 
ब्रह्मराजर्षयश्चैव सर्वे देवर्षयस्तथा॥ २६॥
विमानैर्विविधैर्दिव्यैर्दीप्यमाना इवाग्नय:।
स्रग्विणो भूषिता: सर्वे यान्ति चायान्ति चापरे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मऋषि, राजऋषि तथा समस्त देवर्षि माला धारण किए हुए, वस्त्राभूषणों से विभूषित होकर, अग्नि के समान चमकते हुए नाना प्रकार के दिव्य विमानों द्वारा वहाँ आते-जाते हैं ॥26-27॥
 
The Brahmarishis, Rajrishis and all the Devarshis, wearing garlands and adorned with clothes and ornaments, come and go there in various kinds of celestial aircrafts, shining like fire. ॥26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)