Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.7.16-23: भरतवंशी राजा पाण्डुनन्दन! सहदेव, सुनीथ, महान तपस्वी वाल्मिकी, सत्यवादी शमीक, सत्यप्रतिज्ञ प्रचेता, मेधातिथि, वामदेव, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, मरुत्त, मरीचि, महान तपस्वी स्थाणु, काशीवान, गौतम, तार्क्ष्य, वैश्वानर मुनि, शादर्तु, कवष, धूम्र, रैभ्य, नल, परवसु, स्वस्त्यत्रेय, जरत्कारु, कहोल, कश्यप, विभाण्डक, ऋष्यश्रृंग, प्राच्य, विमुख, कालकवृक्षीय मुनि, आश्रव्य, हिरण्मय, संवर्त, देवहव्य, पराक्रमी विश्वक्सेन, कण्व, कात्यायन, गार्ग्य, कौशिक, दिव्य जल, औषधियाँ, श्रद्धा, मेधा, सरस्वती, अर्थ, धर्म, काम, विद्युत, जलयुक्त बादल, वायु, गरजते हुए बादल, पूर्व दिशा, यज्ञ। सत्ताईस जो भविष्य के पावक को धारण करते हैं, * अग्नि और सोम संयुक्त, इंद्र और अग्नि संयुक्त, मित्र, सविता, अर्यमा, भग, विश्वेदेव, साध्य, बृहस्पति, शुक्र, विश्वावसु, चित्रसेन, सुमन, तरूण, विभिन्न यज्ञ, दक्षिणा, ग्रह, तारा और यज्ञ करने वाले मंत्र - ये सभी इंद्र की सभा में बैठते हैं। 16-23॥ | mahabharat अध्याय 2.7: इन्द्रसभाका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतवंशी राजा पाण्डुनन्दन! सहदेव, सुनीथ, महान तपस्वी वाल्मिकी, सत्यवादी शमीक, सत्यप्रतिज्ञ प्रचेता, मेधातिथि, वामदेव, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, मरुत्त, मरीचि, महान तपस्वी स्थाणु, काशीवान, गौतम, तार्क्ष्य, वैश्वानर मुनि, शादर्तु, कवष, धूम्र, रैभ्य, नल, परवसु, स्वस्त्यत्रेय, जरत्कारु, कहोल, कश्यप, विभाण्डक, ऋष्यश्रृंग, प्राच्य, विमुख, कालकवृक्षीय मुनि, आश्रव्य, हिरण्मय, संवर्त, देवहव्य, पराक्रमी विश्वक्सेन, कण्व, कात्यायन, गार्ग्य, कौशिक, दिव्य जल, औषधियाँ, श्रद्धा, मेधा, सरस्वती, अर्थ, धर्म, काम, विद्युत, जलयुक्त बादल, वायु, गरजते हुए बादल, पूर्व दिशा, यज्ञ। सत्ताईस जो भविष्य के पावक को धारण करते हैं, * अग्नि और सोम संयुक्त, इंद्र और अग्नि संयुक्त, मित्र, सविता, अर्यमा, भग, विश्वेदेव, साध्य, बृहस्पति, शुक्र, विश्वावसु, चित्रसेन, सुमन, तरूण, विभिन्न यज्ञ, दक्षिणा, ग्रह, तारा और यज्ञ करने वाले मंत्र - ये सभी इंद्र की सभा में बैठते हैं। 16-23॥
Bharatvanshi King Pandunandan! Sahadev, Sunith, great ascetic Valmiki, Satyavadi Shamik, Satyapratigya Pracheta, Medhatithi, Vamdev, Pulastya, Pulah, Kratu, Marutt, Marichi, great ascetic Sthanu, Kashivan, Gautam, Tarkshya, Vaishvanar Muni, Shadartu, Kavsh, Dhumra, Raibhya, Nal, Paravasu, Swastyatreya, Jaratkaru, Kahol, Kashyap, Vibhandak, Rishyasringa, Oriented, Vimukh, Kalakvrikshiya Muni, Ashravya, Hiranmay, Sanvarta, Devhavya, Mighty Vishvaksena, Kanva, Katyayana, Gargya, Kaushik, Divine Water, Medicines, Shraddha, Medha, Saraswati, Artha, Dharma, Kama, Electricity, Watery Clouds, Vayu, Roaring Clouds, Eastern Direction, Yagya. twenty-seven who bear the future Pavaka,* Agni and Soma combined, Indra and Agni combined, Mitra, Savita, Aryama, Bhaga, Vishvedev, Sadhya, Brihaspati, Shukra, Vishwavasu, Chitrasena, Suman, Tarun, various yagyas, Dakshina, Graha, Tara and the mantras performing yagyas - all of them sit there in Indra's assembly. 16-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥