| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार » श्लोक 4-6 |
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| | | | श्लोक 2.69.4-6  | युधिष्ठिर उवाच
अयं सहस्रसमितो वैयाघ्र: सुप्रतिष्ठित:।
सुचक्रोपस्कर: श्रीमान् किङ्किणीजालमण्डित:॥ ४॥
संह्रादनो राजरथो य इहास्मानुपावहत्।
जैत्रो रथवर: पुण्यो मेघसागरनि:स्वन:॥
अष्टौ यं कुररच्छाया: सदश्वा राष्ट्रसम्मता:॥ ५॥
वहन्ति नैषां मुच्येत पदाद् भूमिमुपस्पृशन्।
एतद् राजन् धनं मह्यं तेन दीव्याम्यहं त्वया॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | युधिष्ठिर बोले, "यह आनन्दमय राजसी रथ, जो हमें यहाँ लाया है, सभी रथों में श्रेष्ठ, जैत्र नामक परम पवित्र रथ है। चलते समय यह बादलों और समुद्र की गर्जना के समान गम्भीर ध्वनि करता है। यह अकेला ही एक हजार रथों के बराबर है। इस पर व्याघ्र चर्म मढ़ा हुआ है। यह अत्यंत सुदृढ़ है। इसके पहिये तथा अन्य आवश्यक वस्तुएँ अत्यंत सुन्दर हैं। यह अत्यंत शोभायमान रथ छोटी-छोटी घंटियों से सुशोभित है। कुरर पक्षी के समान कान्ति वाले आठ उत्तम घोड़े, जो सम्पूर्ण राष्ट्र में आदरणीय हैं, इस रथ को खींचते हैं। इन घोड़ों के सामने आने पर भूमि को छूने वाला कोई भी प्राणी बच नहीं सकता। हे राजन! इन घोड़ों सहित यह रथ मेरा धन है, जिसे मैं आपके साथ जुए में दांव पर लगाता हूँ।" | | | | Yudhishthira said, "This joyous royal chariot, which has brought us here, is the best of all chariots, the most sacred chariot named Jaitra. When moving, it makes a deep sound like the roar of clouds and the ocean. This alone is equal to a thousand chariots. Tiger's skin is covered on it. It is extremely strong. Its wheels and other essential items are very beautiful. This extremely graceful chariot is decorated with small bells. Eight good horses with the luster like that of the Kurar bird, who are respected in the entire nation, pull this chariot. Any creature touching the ground cannot escape when it comes in front of these horses. O King! This chariot along with these horses is my wealth, which I stake in gambling with you. | |
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