Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.69.22-23: युधिष्ठिर बोले, "मेरे पास गंधर्व देश के तीतरों के समान विचित्र रंग वाले घोड़े हैं, जो स्वर्ण के हारों से सुशोभित हैं। युद्ध में पराजित और अपमानित होने पर संतुष्ट होकर शत्रुदमन चित्ररथ गंधर्व ने उन घोड़ों को गांडीवधारी अर्जुन को प्रेमपूर्वक दान कर दिया। हे राजन! यह मेरा धन है, जिसे मैं दांव पर लगाकर आपके साथ खेलता हूँ।" | mahabharat अध्याय 2.69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर बोले, "मेरे पास गंधर्व देश के तीतरों के समान विचित्र रंग वाले घोड़े हैं, जो स्वर्ण के हारों से सुशोभित हैं। युद्ध में पराजित और अपमानित होने पर संतुष्ट होकर शत्रुदमन चित्ररथ गंधर्व ने उन घोड़ों को गांडीवधारी अर्जुन को प्रेमपूर्वक दान कर दिया। हे राजन! यह मेरा धन है, जिसे मैं दांव पर लगाकर आपके साथ खेलता हूँ।"
Yudhishthira said, "I have horses from Gandharva country with strange colors like partridges, which are adorned with golden necklaces. Satisfied, Shatrudaman Chitrarath Gandharva, after being defeated and insulted in the war, lovingly gifted those horses to Gandivadhari Arjun. O King! This is my wealth which I stake on stake and play with you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥