श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.69.21 
वैशम्पायन उवाच
इत्येवमुक्ते वचने कृतवैरो दुरात्मवान्।
जितमित्येव शकुनिर्युधिष्ठिरमभाषत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! उनके ऐसा कहने पर दुष्टबुद्धि शत्रु शकुनि ने युधिष्ठिर से कहा - 'देखो, मैंने इसे भी जीत लिया है।'
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On his saying this, the evil-minded enemy Shakuni said to Yudhishthira - 'See, I have won this as well.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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