श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.69.18 
वैशम्पायन उवाच
इत्येवंवादिनं पार्थं प्रहसन्निव सौबल:।
जितमित्येव शकुनिर्युधिष्ठिरमभाषत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर से यह कहते हुए शकुनि ने हँसकर कहा - 'यह युद्ध भी मैं जीत गया।'॥18॥
 
Vaishmpayana says: O Janamejaya! While saying these words to Yudhishthira, son of Kunti, Shakuni smilingly said, 'I won this round as well.'॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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