श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.69.15 
युधिष्ठिर उवाच
सहस्रसंख्या नागा मे मत्तास्तिष्ठन्ति सौबल।
हेमकक्षा: कृतापीडा: पद्मिनो हेममालिन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे सुबलपुत्र! मेरे पास एक हजार मदमस्त हाथी हैं, जिनकी रस्सियाँ सोने की बनी हैं। वे सदैव आभूषणों से सुशोभित रहते हैं। उनके गालों और माथे पर कमल के चिह्न बने रहते हैं। उनकी गर्दनें स्वर्ण हारों से सुशोभित रहती हैं।
 
Yudhishthira said, "O son of Subala, I have a thousand intoxicated elephants, whose ropes are made of gold. They are always adorned with ornaments. Lotus marks are made on their cheeks and foreheads. Their necks are decorated with golden necklaces.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas