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mahabharat 2.69.13: वह चतुर, बुद्धिमान, संयमी और युवा है। उसके कानों में कुण्डल चमकते रहते हैं। वह हाथ में भोजन का पात्र लिए दिन-रात अतिथियों को भोजन परोसता रहता है। हे राजन, यह मेरा धन है, जिसे मैं आपके साथ खेलने के लिए दाँव पर लगाता हूँ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 2.69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.69.13 
प्राज्ञा मेधाविनो दान्ता युवानो मृष्टकुण्डला:।
पात्रीहस्ता दिवारात्रमतिथीन् भोजयन्त्युत।
एतद् राजन् मम धनं तेन दीव्याम्यहं त्वया॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह चतुर, बुद्धिमान, संयमी और युवा है। उसके कानों में कुण्डल चमकते रहते हैं। वह हाथ में भोजन का पात्र लिए दिन-रात अतिथियों को भोजन परोसता रहता है। हे राजन, यह मेरा धन है, जिसे मैं आपके साथ खेलने के लिए दाँव पर लगाता हूँ॥13॥
 
He is clever, intelligent, self-controlled and youthful. Earrings keep gleaming in his ears. He keeps serving food to the guests day and night with a food bowl in his hand. O King, this is my wealth, which I stake to play with you.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)