श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.69.12 
युधिष्ठिर उवाच
एतावन्ति च दासानां सहस्राण्युत सन्ति मे।
प्रदक्षिणानुलोमाश्च प्रावारवसना: सदा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "दासियों के समान मेरे एक लाख सेवक हैं। वे कुशल और मिलनसार हैं। उनके शरीर सदैव सुन्दर ऊपरी वस्त्रों से सुशोभित रहते हैं॥ 12॥
 
Yudhishthira said, "Just like maids, I have one lakh servants. They are efficient and friendly. Their bodies are always adorned with beautiful upper garments.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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