श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 69: जूएमें शकुनिके छलसे प्रत्येक दाँवपर युधिष्ठिरकी हार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.69.11 
वैशम्पायन उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रित:।
जितमित्येव शकुनिर्युधिष्ठिरमभाषत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! यह सुनकर कपटी शकुनि ने पुनः विजय का निश्चय कर लिया और पासे फेंककर युधिष्ठिर से कहा - 'इस चाल में भी मैं जीत गया।'
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing this, the deceitful Shakuni once again decided to win and threw the dice and said to Yudhishthira - 'I won this move too.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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