Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.67.6: शकुने! जुआरियों का सम्मान केवल छल-कपट में ही होता है; सज्जन लोग उस सम्मान की कद्र नहीं करते। इसलिए क्रूर व्यक्ति की तरह तुम भी हमें अनुचित तरीकों से जीतने की कोशिश मत करो। 6॥ | mahabharat अध्याय 2.67: जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि मानं प्रशंसन्ति निकृतौ कितवस्य हि।
शकुने मैव नो जैषीरमार्गेण नृशंसवत्॥ ६॥
अनुवाद
शकुने! जुआरियों का सम्मान केवल छल-कपट में ही होता है; सज्जन लोग उस सम्मान की कद्र नहीं करते। इसलिए क्रूर व्यक्ति की तरह तुम भी हमें अनुचित तरीकों से जीतने की कोशिश मत करो। 6॥
Shakune! Gamblers have honor only in deceit; Gentlemen do not appreciate that kind of respect. Therefore, like a cruel person, do not try to win us over through unfair means. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥