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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 67: जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद
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श्लोक 20-21h
श्लोक
2.67.20-21h
दुर्योधन उवाच
अहं दातास्मि रत्नानां धनानां च विशाम्पते॥ २०॥
मदर्थे देविता चायं शकुनिर्मातुलो मम।
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, "हे राजन, मैं आपको दांव पर लगाने के लिए धन और रत्न दूंगा, लेकिन मेरे मामा शकुनि मेरी ओर से खेलेंगे।"
Duryodhan said, "O King, I will give you money and gems to bet on, but my uncle Shakuni will play on my behalf."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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