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mahabharat 2.67.15: धर्मराज! जो मनुष्य जुए में पारंगत है, वह अशिक्षित को चतुराई से जीत लेता है। जो विद्वान अशिक्षित को जीत लेता है, वह भी चतुर है; परन्तु लोग उसे चतुराई नहीं कहते॥15॥   |   mahabharat अध्याय 2.67: जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 67: जूएके अनौचित्यके सम्बन्धमें युधिष्ठिर और शकुनिका संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.67.15 
अक्षैर्हि शिक्षितोऽभ्येति निकृत्यैव युधिष्ठिर।
विद्वानविदुषोऽभ्येति नाहुस्तां निकृतिं जना:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज! जो मनुष्य जुए में पारंगत है, वह अशिक्षित को चतुराई से जीत लेता है। जो विद्वान अशिक्षित को जीत लेता है, वह भी चतुर है; परन्तु लोग उसे चतुराई नहीं कहते॥15॥
 
Dharamraj! One who is well trained in gambling, wins over the uneducated by cunning. A learned man who defeats the uneducated is also cunning; but people do not call it cunning.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)