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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  2.66.d3 
ब्राह्मणेभ्यो धनं दत्त्वा गत्यर्थं स यथाविधि।
अन्येभ्य: स तु दत्त्वार्थं गन्तुमेवोपचक्रमे॥
 
 
अनुवाद
अपनी यात्रा की सफलता के लिए उन्होंने ब्राह्मणों को उचित रीति से धन देकर तथा अन्य लोगों को इच्छित वस्तुएं भेंट करके अपनी यात्रा प्रारंभ की।
 
For the success of his journey, he started his journey by giving money to Brahmins in a proper manner and also by offering desired things to others.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)