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mahabharat 2.66.d12: जनमेजय! इसी प्रकार राजा युधिष्ठिर के पीछे चलने वाले सैनिकों का कोलाहल भी गूँज रहा था, जिससे सारा आकाश स्तब्ध हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक d12
 
 
श्लोक  2.66.d12 
तथैव सैनिका राजन् राजानमनुयान्ति ये॥
तेषां हलहलाशब्दो दिवं स्तब्ध्वा प्रतिष्ठित:।
 
 
अनुवाद
जनमेजय! इसी प्रकार राजा युधिष्ठिर के पीछे चलने वाले सैनिकों का कोलाहल भी गूँज रहा था, जिससे सारा आकाश स्तब्ध हो रहा था।
 
Janamejaya! Similarly, the noise of the soldiers who were following King Yudhishthira was also echoing, stupefying the entire sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)