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mahabharat 2.66.d11: उस मार्ग पर अन्य बहुत से लोग भी मन को एकाग्र करके मृगों और पक्षियों के समान स्वर में प्रसन्नतापूर्वक कुरुराज युधिष्ठिर की स्तुति कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  2.66.d11 
अपरे कुरुराजानं पथि यान्तं समाहिता:॥
स्तुवन्ति सततं सौख्यान्मृगपक्षिस्वनैर्नरा:।
 
 
अनुवाद
उस मार्ग पर अन्य बहुत से लोग भी मन को एकाग्र करके मृगों और पक्षियों के समान स्वर में प्रसन्नतापूर्वक कुरुराज युधिष्ठिर की स्तुति कर रहे थे।
 
On that path, many other people were concentrating their minds and happily praising the Kuru King Yudhishthir in the voices like deer and birds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)