Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.66.6: विदुर बोले, हे राजन! इन्द्र के समान प्रभावशाली महाबुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र अपने बन्धुओं और पुत्रों सहित कुशलपूर्वक हैं। वे अपने दीन-हीन पुत्रों के साथ सुखी हैं। वे शोक से मुक्त हैं। वे महाबुद्धिमान पुरुष अपने आत्म-परायण हैं। ॥6॥ | mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विदुर उवाच
राजा महात्मा कुशली सपुत्र
आस्ते वृतो ज्ञातिभिरिन्द्रकल्प:।
प्रीतो राजन् पुत्रगणैर्विनीतै-
र्विशोक एवात्मरतिर्महात्मा॥ ६॥
अनुवाद
विदुर बोले, हे राजन! इन्द्र के समान प्रभावशाली महाबुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र अपने बन्धुओं और पुत्रों सहित कुशलपूर्वक हैं। वे अपने दीन-हीन पुत्रों के साथ सुखी हैं। वे शोक से मुक्त हैं। वे महाबुद्धिमान पुरुष अपने आत्म-परायण हैं। ॥6॥
Vidur said, O King! The great-minded king Dhritarashtra, who is as influential as Indra, is well along with his kinsmen and sons. He is happy with his humble sons. He is free from sorrow. That great-minded person is devoted to his own soul. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥