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mahabharat 2.66.5: युधिष्ठिर बोले- विदुरजी! आपका मन प्रसन्न नहीं लग रहा। आप कुशलपूर्वक तो आ गए? वृद्ध राजा धृतराष्ट्र के पुत्र तो उनके अनुकूल आचरण कर रहे हैं न? और समस्त प्रजा भी उनके अधीन है न?॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.66.5 
युधिष्ठिर उवाच
विज्ञायते ते मनसोऽप्रहर्ष:
कच्चित् क्षत्त: कुशलेनागतोऽसि।
कच्चित् पुत्रा: स्थविरस्यानुलोमा
वशानुगाश्चापि विशोऽथ कच्चित्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले- विदुरजी! आपका मन प्रसन्न नहीं लग रहा। आप कुशलपूर्वक तो आ गए? वृद्ध राजा धृतराष्ट्र के पुत्र तो उनके अनुकूल आचरण कर रहे हैं न? और समस्त प्रजा भी उनके अधीन है न?॥5॥
 
Yudhishthira said— Vidurji! Your mind does not seem to be happy. Have you come safely? The sons of old king Dhritarashtra are behaving in his favor, right? And all the subjects are under his control, right?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)