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mahabharat 2.66.32-33: तत्पश्चात् धृतराष्ट्र की अनुमति लेकर पाण्डवों ने रत्नमय गृहों में प्रवेश किया। दु:शाला आदि स्त्रियों ने वहाँ आकर उन सबको देखा। द्रुपदकुमारी का प्रज्वलित अग्नि के समान उत्तम ऐश्वर्य देखकर धृतराष्ट्र की बहुएँ प्रसन्न नहीं हुईं। 32-33॥   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  2.66.32-33 
विविशुस्तेऽभ्यनुज्ञाता रत्नवन्ति गृहाणि च।
ददृशुश्चोपयातांस्तान् दु:शलाप्रमुखा: स्त्रिय:॥ ३२॥
याज्ञसेन्या: परामृद्धिं दृष्ट्वा प्रज्वलितामिव।
स्नुषास्ता धृतराष्ट्रस्य नातिप्रमनसोऽभवन्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धृतराष्ट्र की अनुमति लेकर पाण्डवों ने रत्नमय गृहों में प्रवेश किया। दु:शाला आदि स्त्रियों ने वहाँ आकर उन सबको देखा। द्रुपदकुमारी का प्रज्वलित अग्नि के समान उत्तम ऐश्वर्य देखकर धृतराष्ट्र की बहुएँ प्रसन्न नहीं हुईं। 32-33॥
 
After that, taking the permission of Dhritarashtra, the Pandavas entered the jewel-filled houses. Dushala etc. women came there and saw them all. Dhritarashtra's daughters-in-law were not very happy after seeing Drupadakumari's excellent prosperity like the burning fire. 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)