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mahabharat 2.66.24-28: तत्पश्चात्, पराक्रमी महाबाहु युधिष्ठिर ने सोमदत्त, दुर्योधन, शल्य, शकुनि आदि राजाओं से भेंट की, जो वहाँ पहले से ही आये हुए थे। तत्पश्चात्, पराक्रमी दु:शासन, अपने समस्त भाइयों, राजा जयद्रथ और समस्त कौरवों से मिलकर, महाबाहु युधिष्ठिर ने भाइयों सहित बुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र के महल में प्रवेश किया और वहाँ रोहिणी देवी के समान सर्वदा तारों से घिरी रहने वाली, अपनी पुत्रवधुओं के साथ बैठी हुई पतिव्रता गांधारी देवी को देखा। युधिष्ठिर ने गांधारी को प्रणाम किया और गांधारी ने भी उन्हें आशीर्वाद देकर प्रसन्न किया।॥24-28॥   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 24-28
 
 
श्लोक  2.66.24-28 
समेत्य च महाबाहु: सोमदत्तेन चैव ह।
दुर्योधनेन शल्येन सौबलेन च वीर्यवान्॥ २४॥
ये चान्ये तत्र राजान: पूर्वमेव समागता:।
दु:शासनेन वीरेण सर्वैर्भ्रातृभिरेव च॥ २५॥
जयद्रथेन च तथा कुुरुभिश्चापि सर्वश:।
तत: सर्वैर्महाबाहुर्भ्रातृभि: परिवारित:॥ २६॥
प्रविवेश गृहं राज्ञो धृतराष्ट्रस्य धीमत:।
ददर्श तत्र गान्धारीं देवीं पतिमनुव्रताम्॥ २७॥
स्नुषाभि: संवृतां शश्वत् ताराभिरिव रोहिणीम्।
अभिवाद्य स गान्धारीं तया च प्रतिनन्दित:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, पराक्रमी महाबाहु युधिष्ठिर ने सोमदत्त, दुर्योधन, शल्य, शकुनि आदि राजाओं से भेंट की, जो वहाँ पहले से ही आये हुए थे। तत्पश्चात्, पराक्रमी दु:शासन, अपने समस्त भाइयों, राजा जयद्रथ और समस्त कौरवों से मिलकर, महाबाहु युधिष्ठिर ने भाइयों सहित बुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र के महल में प्रवेश किया और वहाँ रोहिणी देवी के समान सर्वदा तारों से घिरी रहने वाली, अपनी पुत्रवधुओं के साथ बैठी हुई पतिव्रता गांधारी देवी को देखा। युधिष्ठिर ने गांधारी को प्रणाम किया और गांधारी ने भी उन्हें आशीर्वाद देकर प्रसन्न किया।॥24-28॥
 
Thereafter, the valiant Mahabahu Yudhishthira met Somadatta and Duryodhan, Shalya, Shakuni and the kings who had already arrived there. Then after meeting the valiant Dushasan, all his brothers, King Jayadratha and all the Kauravas, Mahabahu Yudhishthira along with his brothers entered the palace of the wise King Dhritarashtra and saw the devoted Gandhari Devi sitting with her daughters-in-law, like Rohini Devi who is always surrounded by stars. Yudhishthira bowed to Gandhari and Gandhari also pleased them by blessing them.॥24-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)