Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.66.16: मुझे जुआ खेलने की कोई इच्छा नहीं है। यदि विजयी राजा धृतराष्ट्र मुझे राजसभा में न बुलाते, तो मैं शकुनि के साथ कभी जुआ न खेलता; किन्तु यदि बुलाया जाता, तो मैं कभी पीछे नहीं हटता। यह मेरा सनातन नियम है॥16॥ | mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चाकाम: शकुनिना देविताहं
न चेन्मां जिष्णुराह्वयिता सभायाम्।
आहूतोऽहं न निवर्ते कदाचित्
तदाहितं शाश्वतं वै व्रतं मे॥ १६॥
अनुवाद
मुझे जुआ खेलने की कोई इच्छा नहीं है। यदि विजयी राजा धृतराष्ट्र मुझे राजसभा में न बुलाते, तो मैं शकुनि के साथ कभी जुआ न खेलता; किन्तु यदि बुलाया जाता, तो मैं कभी पीछे नहीं हटता। यह मेरा सनातन नियम है॥16॥
I have no desire to gamble. Had the victorious King Dhritarashtra not called me to the court, I would never have gambled with Shakuni; but if called, I will never back out. This is my eternal rule.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥