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mahabharat 2.66.11: विदुर जी बोले - विद्वान् ! मैं जानता हूँ कि जुआ सब बुराइयों की जड़ है; इसीलिए मैंने उसे रोकने का प्रयत्न किया है। तथापि, यह सुनकर कि राजा धृतराष्ट्र ने मुझे आपके पास भेजा है, आप जो हितकर समझें, वही करें ॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.66.11 
विदुर उवाच
जानाम्यहं द्यूतमनर्थमूलं
कृतश्च यत्नोऽस्य मया निवारणे।
राजा च मां प्राहिणोत् त्वत्सकाशं
श्रुत्वा विद्वञ्छ्रेय इहाचरस्व॥ ११॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले - विद्वान् ! मैं जानता हूँ कि जुआ सब बुराइयों की जड़ है; इसीलिए मैंने उसे रोकने का प्रयत्न किया है। तथापि, यह सुनकर कि राजा धृतराष्ट्र ने मुझे आपके पास भेजा है, आप जो हितकर समझें, वही करें ॥ 11॥
 
Vidur ji said - Scholar! I know that gambling is the root of all evil; that is why I have tried to stop it. However, after hearing that King Dhritarashtra has sent me to you, do whatever you think is beneficial. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)