Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.66.10: युधिष्ठिर ने पूछा- विदुरजी! जुआ खेलने से झगड़े और कलह होते हैं। कौन समझदार व्यक्ति जुआ खेलना पसंद करेगा या आप क्या उचित समझते हैं; हम सब आपकी आज्ञा का पालन करने वाले हैं॥ 10॥ | mahabharat अध्याय 2.66: विदुर और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें जाकर सबसे मिलना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
द्यूते क्षत्त: कलहो विद्यते न:
को वै द्यूतं रोचयेद् बुध्यमान:।
किं वा भवान् मन्यते युक्तरूपं
भवद्वाक्ये सर्व एव स्थिता: स्म॥ १०॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- विदुरजी! जुआ खेलने से झगड़े और कलह होते हैं। कौन समझदार व्यक्ति जुआ खेलना पसंद करेगा या आप क्या उचित समझते हैं; हम सब आपकी आज्ञा का पालन करने वाले हैं॥ 10॥
Yudhishthira asked- Vidurji! Gambling leads to quarrels and disputes. Which sensible person would like to gamble or what do you think is right; we all are going to follow your orders.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥