श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 65: विदुर और धृतराष्ट्रकी बातचीत  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.65.5 
तदद्य विदुर प्राप्य राजानं मम शासनात्।
क्षिप्रमानय दुर्धर्षं कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अतः हे विदुर, मेरी आज्ञा से आज ही राजा युधिष्ठिर के पास जाओ और उस कुन्तीपुत्र को शीघ्र ही यहाँ ले आओ॥5॥
 
Therefore, Vidur, by my order, go to King Yudhishthira today and bring that fierce son of Kunti here quickly. ॥ 5॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि युधिष्ठिरानयने सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें युधिष्ठिरके बुलानेसे सम्बन्ध रखनेवाला सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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