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mahabharat 2.64.9: यदि मूर्ख मनुष्य सब प्रकार के भय को त्यागकर और अपनी रक्षा करने का प्रयत्न करके भी चुपचाप बैठा रहे और कोई प्रयत्न न करे, तो वह वर्षा ऋतु में भीगी हुई चटाई के समान नष्ट हो जाता है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 2.64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.64.9 
भयं परिहरन् मन्द आत्मानं परिपालयन्।
वर्षासु क्लिन्नकटवत् तिष्ठन्नेवावसीदति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि मूर्ख मनुष्य सब प्रकार के भय को त्यागकर और अपनी रक्षा करने का प्रयत्न करके भी चुपचाप बैठा रहे और कोई प्रयत्न न करे, तो वह वर्षा ऋतु में भीगी हुई चटाई के समान नष्ट हो जाता है॥9॥
 
If a foolish man, despite having given up all fear and trying to protect himself, sits quietly and makes no effort, he gets destroyed like a mat wet during the rainy season.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)