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mahabharat 2.64.5: दुर्योधन ने कहा, "हे राजन! यह मामा पासा फेंकने की कला में बहुत निपुण है। यह जुए के द्वारा पांडवों का धन हड़पने के लिए आतुर है। कृपया उसे इसके लिए अनुमति दीजिए।"   |   mahabharat अध्याय 2.64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.64.5 
दुर्योधन उवाच
अयमुत्सहते राजञ्छ्रियमाहर्तुमक्षवित्।
द्यूतेन पाण्डुपुत्रेभ्यस्तदनुज्ञातुमर्हसि॥ ५॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, "हे राजन! यह मामा पासा फेंकने की कला में बहुत निपुण है। यह जुए के द्वारा पांडवों का धन हड़पने के लिए आतुर है। कृपया उसे इसके लिए अनुमति दीजिए।"
 
Duryodhan said, "O King! This uncle is very skilled in the art of throwing dice. He is eager to take away the wealth of the Pandavas through gambling. Please give him permission for that."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)