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mahabharat 2.64.16: बुद्धि और ज्ञान के अनुयायी विद्वान विदुर ने इन सब परिणामों को पहले ही देख लिया था। क्षत्रियों के लिए विनाशकारी यह महान भय असहाय होकर मेरे सामने आ रहा है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 2.64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.64.16 
दृष्टं ह्येतद् विदुरेणैव सर्वं
विपश्चिता बुद्धिविद्यानुगेन।
तदेवैतदवशस्याभ्युपैति
महद् भयं क्षत्रियजीवघाति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि और ज्ञान के अनुयायी विद्वान विदुर ने इन सब परिणामों को पहले ही देख लिया था। क्षत्रियों के लिए विनाशकारी यह महान भय असहाय होकर मेरे सामने आ रहा है॥16॥
 
Vidura, the learned follower of wisdom and knowledge, had foreseen all these consequences. This great fear, which is disastrous for the Kshatriyas, is coming before me helplessly.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)