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mahabharat 2.64.14: यह जुआ हम खिलाड़ियों के लिए स्वर्गीय सुख का एक विशेष द्वार है। यह इसके आस-पास बैठे लोगों के लिए भी उतना ही सुखदायी है। इस प्रकार पांडवों को भी हमारे समान ही सुख प्राप्त होगा। अतः आप पांडवों के साथ जुआ खेलने की व्यवस्था करें।   |   mahabharat अध्याय 2.64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.64.14 
स्वर्गद्वारं दीव्यतां नो विशिष्टं
तद्वर्तिनां चापि तथैव युक्तम्।
भवेदेवं ह्यात्मना तुल्यमेव
दुरोदरं पाण्डवैस्त्वं कुरुष्व॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह जुआ हम खिलाड़ियों के लिए स्वर्गीय सुख का एक विशेष द्वार है। यह इसके आस-पास बैठे लोगों के लिए भी उतना ही सुखदायी है। इस प्रकार पांडवों को भी हमारे समान ही सुख प्राप्त होगा। अतः आप पांडवों के साथ जुआ खेलने की व्यवस्था करें।
 
This gambling is a special door to heavenly pleasure for us players. It is equally pleasant for the people sitting around it. In this way, the Pandavas will also get the same pleasure as us. Therefore, you should arrange for gambling with the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)