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mahabharat 2.64.13: दुर्योधन ने कहा- पिताश्री! पासों का खेल तो प्राचीन लोग भी खेलते आए हैं। इसमें न तो कोई दोष है और न ही इससे युद्ध होता है। अतः आप मामा शकुनि की बात मानकर शीघ्र ही यहाँ (जुआ खेलने के लिए) एक भवन बनवाने का आदेश दें॥ 13॥   |   mahabharat अध्याय 2.64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.64.13 
दुर्योधन उवाच
द्यूते पुराणैर्व्यवहार: प्रणीत-
स्तत्रात्ययो नास्ति न सम्प्रहार:।
तद् रोचतां शकुनेर्वाक्यमद्य
सभां क्षिप्रं त्वमिहाज्ञापयस्व॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- पिताश्री! पासों का खेल तो प्राचीन लोग भी खेलते आए हैं। इसमें न तो कोई दोष है और न ही इससे युद्ध होता है। अतः आप मामा शकुनि की बात मानकर शीघ्र ही यहाँ (जुआ खेलने के लिए) एक भवन बनवाने का आदेश दें॥ 13॥
 
Duryodhan said- Father! Even the ancient people have played the game of dice. There is neither any fault in it nor does it lead to war. Therefore, you should accept the words of uncle Shakuni and order to construct a hall here (for gambling) soon.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)