Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.64.12: राजकुमार! आप जुए के अनर्थ को ही एकमात्र अर्थ मान रहे हैं। यह जुआ केवल कलह उत्पन्न करता है और अत्यंत भयंकर है। यदि यह किसी प्रकार प्रारंभ हो जाए, तो तीक्ष्ण तलवारें और बाण भी उत्पन्न कर देगा। 12. | mahabharat अध्याय 2.64: धृतराष्ट्र और दुर्योधनकी बातचीत, द्यूतक्रीड़ाके लिये सभानिर्माण और धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको बुलानेके लिये विदुरको आज्ञा देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजकुमार! आप जुए के अनर्थ को ही एकमात्र अर्थ मान रहे हैं। यह जुआ केवल कलह उत्पन्न करता है और अत्यंत भयंकर है। यदि यह किसी प्रकार प्रारंभ हो जाए, तो तीक्ष्ण तलवारें और बाण भी उत्पन्न कर देगा। 12.
Prince! You are considering the disaster of gambling as the only meaning. This gambling only creates discord and is extremely dangerous. If it somehow starts, it will also create sharp swords and arrows. 12.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥