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mahabharat 2.63.9: जो साधन शत्रु को संकट में डाल दे, चाहे वह प्रकट हो या गुप्त, वह शस्त्र जानने वालों का शस्त्र है। जो शस्त्र केवल काटता है, वह शस्त्र नहीं है।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 2.63: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको उकसाना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 63: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको उकसाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.63.9 
प्रच्छन्नो वा प्रकाशो वा योगो योऽरि प्रबाधते।
तद् वै शस्त्रं शस्त्रविदां न शस्त्रं छेदनं स्मृतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो साधन शत्रु को संकट में डाल दे, चाहे वह प्रकट हो या गुप्त, वह शस्त्र जानने वालों का शस्त्र है। जो शस्त्र केवल काटता है, वह शस्त्र नहीं है।॥9॥
 
The means which can put the enemy in trouble, whether open or hidden, is the weapon of those who know weapons. A weapon which only cuts is not a weapon.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)