Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.63.4: जो नेता दूसरों की बुद्धि का अनुसरण करता है, वह अपने मार्ग के विषय में सदैव असमंजस में रहता है। फिर उसके अनुयायी अपने मार्ग का अनुसरण कैसे कर सकते हैं?॥4॥ | mahabharat अध्याय 2.63: दुर्योधनका धृतराष्ट्रको उकसाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परनेयोऽग्रणीर्यस्य स मार्गान् प्रति मुह्यति।
पन्थानमनुगच्छेयु: कथं तस्य पदानुगा:॥ ४॥
अनुवाद
जो नेता दूसरों की बुद्धि का अनुसरण करता है, वह अपने मार्ग के विषय में सदैव असमंजस में रहता है। फिर उसके अनुयायी अपने मार्ग का अनुसरण कैसे कर सकते हैं?॥4॥
The leader of a group who follows the wisdom of others is always confused about his own path. Then how can those who follow him follow their own path?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥